कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार में प्रधानमंत्री रहे अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने साल 2008 में एक बयान दिया था। मनमोहन सिंह ने कहा था कि मैं देश को ये याद दिलाना चाहता हूं कि तेल कंपनियों को OIL BONDS जारी करना प्रॉब्लम का परमानेंट सॉल्यूशन नहीं है। ये पैसा कल हमारे बच्चों को चुकना पड़ेगा। कर्ज का ये बोझ आने वाले समय में हमारे आने वाले बच्चे उठाएंगे।
कुछ याद आया…
मनमोहन सिंह ने कहा था कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते। तो कभी ये कहा कि OIL BONDS को लेकर जो कर्जा हम तेल कंपनियों से ले रहे हैं उसका भुगतान आज नहीं, कल हमारे बच्चों को करना पड़ेगा। आज यही कर्जा मोदी के माथे पर मनमोहन सरकार की गलत नीतियों की वजह से चढ़ा है। अब जिसको चुका रही है देश की जनता।
अब पूरी बात समझाते हैं आपको…
दरअसल, वह यूपीए (United Progressive Alliance or UPA यानी संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन यानी संप्रग। इसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थी। इसमें कांग्रेस ने अन्य दलों को जोड़कर सरकार बनाई थी जिसमें 2004 में 10 दल शामिल थे जो बाद में 15 हो गए थे ) राज का समय था ( वर्ष 2004 से 2014 तक कहने भर को मनमोहन सिंह की सरकार रही जिसे वास्तव में सोनिया गांधी चला रही थी )। इस दौरान एक तरफ बैंकों में नीरव मोदी। विजय माल्या जैसे लुटेरों ने लूट मचा कर रखी हुई थी।
राहुल गांधी, चिदम्बरम जैसे नेताओं के एक फोन पर बैंक लाखों करोड़ रुपये का लोन लुटेरे उद्योगपतियों को बांटे जा रहे रहे थे। बैंकिंग व्यवस्था दम तोड़ रही थी और दूसरी तरफ कोयला। टू जी, अगस्टा घोटाला। जैसे सैकड़ों घोटाले करके कांग्रेस और उसकी चमची पार्टियां देश को चारों तरफ से नोच रही थी। ऐसे में इकॉनोमी की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। जनता त्राहिमाम कर रही थी। तो मनमोहन सरकार ने फॉर्मूला ढूंढ निकाला। जनता कुछ ना बोले। जनता को भी खामोश कर दो। इस उद्देश्य से सोनिया गांधी के निर्देश पर मनमोहन सिंह ने तेल पर भारी मात्रा में सब्सिडी देने का फैसला किया और इसके लिए Oil Bonds का फॉर्मूला ढूंढ निकाला गया।
साल 2008 में मनमोहन सिंह सरकार ने तेल कंपनियों को करीब एक लाख 31 हजार करोड़ (1,31,000,0000000) से ज्यादा की कीमत के ऑयल बोंड जारी कर दिए। ये Oil Bonds एक तरह से तेल कंपनियों को दिया गया गारंटी का दस्तावेज था कि अभी आप हमको सब्सिडी वाला पेट्रोल दो बाद में हम आपको इस oil Bonds की कीमत अदा करेंगे। उस वक्त की सरकार ने 8 प्रतिशत से ज्यादा के ब्याज पर ये Oil Bonds जारी किए थे।
साल 2004 से साल 2014 तक देश की जनता को सब्सिडी वाला तेल मिला। लाखों करोड़ की सब्सिडी दी गई। यानी यूपीए राज में कर्ज लो ओर घी पियो की नीति पर देश की जनता को सस्ता तेल मिलता रहा।
अब यूपीए सरकार के द्वारा दिए गए Oil Bonds की वजह से साल 2026 तक आपको Oil Bonds के एक लाख 31 हजार करोड़ रुपये तेल कंपनियों को अदा करने हैं और इसीलिए तेल महंगा हो रहा है।
यानी हालत ये है कि मोदी सरकार को तेल कंपनियों को कर्ज का मूलधन तो चुकाना ही पड़ रहा है और साथ ही 8 प्रतिशत के हिसाब से दिया गया ब्याज भी हर महीने करीब 10 हजार करोड़ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। क्योंकि मनमोहन सरकार में जबरदस्त आर्थिक अय्याशी यानी भ्रष्टाचार और घोटाला हुआ।
उधर अब कांग्रेस के नेता बड़ी ही बेशर्मी से कह रहे हैं कि उनकी सरकार थी तो तेल के दाम नहीं बढ़ने दिए थे। यह भी दावा करते हैं कि तब अंतर राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल यानी पेट्रोलियम ( इसी पेट्रोलियम को अलग अलग तापमान पर गरम करने पर पेट्रोल, डीजल, ग्रीस, वैसलीन, मोम, मोबी ऑयल और सबसे बाद में तारकोल निकलता है ) 108 डॉलर प्रति बैरल था। तब भी तेल के दाम नहीं बढ़ने दिए गए थे जबकि मोदी सरकार में 70 डॉलर प्रति बैरल कच्चा तेल होने पर भी दाम कम नहीं हो रहे हैं लेकिन वे आपको सच्चाई नहीं बताएंगे कि सरकार क्यों दाम कम नहीं कर रही है। अब जबकि सरकार ने तेल कंपनियों को सब्सिडी या ऑयल बोंड जारी करने बंद कर दिए तो दाम बढ़ने लाजमी हैं।
एक सच्चाई और जान लीजिए कि ऑयल बोंड के साथ ही तेल कंपनियों को रेट तय करने का अधिकार कांग्रेस की सरकार ने ही दिया था।
एक सच्चाई और जान लीजिए…
सरकार इस पर इसलिए खुल कर नहीं बोल पा रही है क्योंकि इसमें गोपनीयता की शर्त जुड़ी हुई है। और पद की शपथ लेते हुए गोपनीयता की भी शपथ ली जाती है। जिसके उल्लंघन पर पद छोड़ना पड़ता है। यानी अपने अर्थशास्त्री सोनिया की अगुवाई में ऐसा खेल कर गए जो भी 2021 से 2026 तक सरकार रहेगी वह ऑयल बोंड का भुगतान करेगी। अगर नहीं करेगी तो एक तो समझौते का उल्लंघन और दूसरा, ऑयल कंपनियों को पैसा नहीं मिलने पर वह नुकसान में आकर दिवालिया होने के कगार पर पहुंच जाएंगी। उस हालत में भी सरकार को अर्थव्यवस्था को बचाने के इन कंपनियों को लाखों करोड़ों का पैकेज देना ही पड़ेगा। यानी दोनों तरफ से 2021 से 2026 तक रहने वाली सरकार को ही पैसा देना पड़ेगा। तो ये था कांग्रेसियों का तेल का खेल।
10 साल यूपीए की आर्थिक अय्याशियों और घोटालों की सजा आज देश भुगत रहा है। जिसका खामियाजा हम आज भर रहे हैं और 2026 तक भरेंगे। जिस किसी को मेरे लिखे हुए तथ्यों पर संदेह हो वह पीएमओ से 2004 से लेकर 2014 तक की अवधि तक केंद्र सरकार द्वारा कच्चा तेल आयात करने, ऑयल बोंड जारी करने और तेल कंपनियों को रेट तय करने का अधिकार देने सहित जो भी बिंदु मन में आएं, उन पर आरटीआई मांग सकते हैं। इस मामले में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं, आपके नहीं।
- आरके दक्ष
वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

