नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 10वीं और 12वीं कक्षाओं के पहले टर्म की बोर्ड परीक्षा के लिए निर्धारित पैटर्न को स्कूल प्रिंसिपल क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं। प्रधानाचार्यों का कहना है कि इस तरह परीक्षा देने से न केवल विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच का विकास होगा, बल्कि जवाब रटने की आदत भी दूर होगी। उनकी सोचने-समझने की शक्ति भी बढ़ेगी।
इस पैटर्न से स्कूल पहले से ही बच्चों को प्री-बोर्ड में परिचित करा रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण सीबीएसई ने जुलाई में घोषणा की थी कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 में 10वीं व 12वीं की परीक्षा के लिए विशेष मूल्यांकन योजना लागू की जा रही है। इसके तहत पाठ्यक्रम को आधा-आधा करके दो सत्र में बांटा गया है। पहले सत्र की 10वीं की मुख्य परीक्षाओं की शुरुआत 30 नवंबर और 12वीं की मुख्य परीक्षाओं की शुरुआत 1 दिसंबर से होने जा रही है। इसमें छात्रों को 90 मिनट में एमसीक्यू (वस्तुनिष्ठ प्रश्नों) को हल करना है।
उन्हें प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 15 की जगह 20 मिनट मिलने हैं। इस तरह से परीक्षा लेना एक क्रांतिकारी कदम है। नए वैकल्पिक और वस्तुनिष्ठ स्वरूप में प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए बीस मिनट का समय मिला है, यह अच्छी बात है। इससे छात्रों को सही उत्तर चुनने से पहले प्रश्न और विकल्पों को सही से पढ़ने का मौका मिलेगा। मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन होने के कारण उनकी रटने की आदत दूर होगी और विषयों को पढ़ने की समझ बढ़ेगी। सोचने-समझने की क्षमता का विकास होगा। साथ ही तनाव दूर होगा।
स्कूलों का कहना है कि इस तरह से परीक्षा पहली बार हो रही है। यह बच्चों के लिए बिल्कुल नई है। लिहाजा इससे बच्चों को परिचित कराने के लिए प्री-बोर्ड परीक्षा भी ओएमआर शीट पर ली जा रही है। इस तरह के पैटर्न से बच्चों की पढ़ाई भी अच्छी होगी और उनके कॉन्सेप्ट स्पष्ट होंगे। प्री-बोर्ड परीक्षा में 90 मिनट ही रखे जा रहे हैं, ताकि वे मुख्य परीक्षा के लिए तैयार हो जाएं। प्रश्न को समझने के साथ वे तर्कपूर्ण तरीके से विकल्पों को भी समझेंगे।

