नई दिल्ली। स्मार्ट फोन में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) से लोग ऑनलाइन लेनदेन ज्यादा करते हैं। ऐसे में उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। दिल्ली-एनसीआर के साथ ही मेरठ मंडल में सबसे ज्यादा नोएडा के लोग ही यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। पान की गुमटी से लेकर मॉल के सुपर बाजार तक में ज्यादातर लोग यूपीआई से ही भुगतान करते है। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और मेवात के साइबर ठगों की पहली पसंद नोएडा ही है। शायद ही कोई ऐसा दिन होता है, जब यहां किसी व्यक्ति के यूपीआई या बैंक खाते पर सेंध न मारी जाती हो।
नोएडा सहित एनसीआर में लगातार बढ़ती साइबर ठगी को देखते हुए 2018 में मेरठ मंडल का साइबर धाना यहीं सेक्टर-36 में स्थापित किया गया था। साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि प्रतिदिन तीन से चार मामलों की शिकायतें उनके पास पहुंचती हैं। साइबर थाने में मेरठ मंडल के हापुड़, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर और नोएडा से शिकायतें आती हैं। जांच के बाद साइबर क्राइम के ऐसे मामले जिनमें एक लाख से ऊपर की ठगी की गई हो और वह जटिल श्रेणी से संबंधित हों दर्ज कर लिया जाता है। एक लाख से कम की ठगी से संबंधित मामले को सेक्टर-108 स्थित जिले के साइबर सैल को स्थानांतरित कर दिया जाता है। 2021 की ही बात की जाए तो नोएडा के करीब 25 से ज्यादा मामले साइबर थाने में दर्ज हुए हैं। यह वह मामले हैं जो न केवल जटिल श्रेणी के हैं, बल्कि उनमें ठगी भी एक लाख रुपये से ज्यादा हुई है, जबकि 300 से ज्यादा मामले जांच के बाद यहां से विभिन्न थानों को ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल, झारखंड और मेवात से चलता है नेटवर्क
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि शहर में ज्यादातर घटनाओं के तार पश्चिम बंगाल के वर्धमान और 24 परगना जिलों से जुड़ते हैं। इसके अलावा झारखंड के जामताड़ा और मेवात, हरियाणा के गिरोह भी यहां लोगों को लालच देकर यूपीआई में सेंध लगाते हैं। यह तीनों ही जगह ऐसी हैं जहां कुछ ही दूरी पर मोबाइल के टावर बदल जाते हैं। उदाहरण के तौर पर मेवात में मात्र 300 मीटर के दायरे में ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के टावर मोबाइल से कनेक्ट रहते हैं। इससे सर्विलांस एक्सपर्ट भी कई बार परेशान हो जाते हैं। सर्विलांस के माध्यम से आरोपियों पर नजर रखने का काम किया जाता है, लेकिन मात्र 300 मीटर का दायरा होने के कारण हर पांच से दस मिनट में आरोपी की लोकेशन राज्य स्तर पर बदल जाती है। कभी उसकी लोकेशन हरियाणा तो कभी यूपी और कभी राजस्थान में आती है।
जामताड़ा के हालात भी ऐसे ही हैं। यहां के साइबर ठगों पर तो वेब सीरीज तक बन चुकी है।
स्मार्ट फोन पर मैसेज भेजकर फंसाते हैं
ठग लोगों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर लालच देते हैं। कभी किसी कंपनी के नाम से 80 फीसदी तक की छूट का ऑफर दिया जाता है तो कभी क्यूआर कोड भेजकर सीधे लॉटरी के माध्यम से रुपये जीतने का झांसा दिया जाता है।
यूपीआई के नोटिफिकेशन में भी ऐसे मैसेज भेजकर ठग लोगों को लालच देते हैं।
कई बार व्हाट्सएप और फेसबुक खाते पर भी लिंक व क्यूआर कोड भेजे जाते हैं। लोगों को चाहिए कि ऐसे किसी भी लिंक को क्लिक न करें और न ही अनावश्यक किसी क्यूआर कोड को स्कैन करें।

