किसानों के लिए वरदान है इसकी खेती, लागत बहुत ही कम और मुनाफा पांच गुना, जानिए कैसे

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हम एक ऐसी खेती के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। आप तो जानते हैं कि किसान खेतों में दिन रात मेहनत करते हैं फसल उगाते हैं कई बार दैवीय प्रकोप के चलते उनकी फसल खराब हो जाती है, तो कई बार फसल तैयार हो जाती है तो उसके वाजिब मूल्य नहीं मिल पाते, लेकिन जिस खेती के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वह काफी फायदेमंद है उसमें ना तो आपको बहुत ज्यादा लागत लगानी है और न बहुत ज्यादा मेहनत करनी है और न ही उसको बेचने के लिए आपको मशक्कत करनी पड़ेगी।

जी हां हम बात कर रहे हैं आर्टीमीशिया की खेती की। दरअसल आर्टीमीशिया एक औषधीय पौधा है। इसकी खेती भी मार्च माह के बाद जब किसानों के खेत 3 महीने तक खाली पड़े रहते हैं तभी की जा सकती है। मार्च में बुवाई के बाद जून में इसकी फसल कटने के लिए तैयार हो जाती है। जो किसान इसकी खेती कर रहे हैं वह बताते हैं की 1 एकड़ में ₹5000 की लागत आती है, जबकि इसमें करीब ₹70000 की पैदावार होती है। यानी कि किसानों को 60 से ₹65000 का फायदा हो जाता है। इस औषधीय फसल में पानी की अधिक जरूरत नहीं पड़ती है। इसका प्लांटेशन भी मार्च महीने में कर दिया जाता है। कई मामलों में किसानों को उद्यान विभाग बीज और मार्केट भी उपलब्ध कराता है । इसके अलावा इसमें खाद की भी बहुत अधिक जरूरत नहीं पड़ती है।

अगर हम इसकी तुलना कुछ और फसलों से करें तो इसको ऐसे समझिए । एक एकड़ में गेहूं चना लाही की फसल के लिए आपको ₹6000 खर्च करने पड़ते हैं जबकि आपको फायदा मिलता है 15000 का। इसी तरह तिल मूंग, उड़द, ज्वार में ₹3000 खर्च करके ₹20000 कमाते हैं। वहीं आर्टीमीशिया की खेती के लिए आपको 1 एकड़ में खर्च करने पड़ते हैं मात्र ₹5000 और आपको फायदा होता है करीब ₹70000 का।

आपको लग रहा होगा कि आर्टीमीशिया है क्या और इसकी आवश्यकता क्या हैं। दरअसल हमने पहले ही बताया आपको यह एक औषधीय प्लांट है। यह सामान्य बुखार के साथ.साथ मलेरिया के बुखार के लिए दवा बनाने के काम आती है। इसलिए आयुर्वेदिक कंपनियां इसे बड़ी मात्रा में खरीदती है।

अन्य फसलों को बाजार तक पहुंचाने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन आर्टीमीशिया के लिए उन्हें कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है, घर बैठे आयुर्वेदिक कंपनियों के एजेंट गांव में आकर किसानों की फसल खरीद लेते हैं। इतना ही नहीं कई जगहों पर तो एजेंट इसकी एडवांस बुकिंग भी करा कर जाते हैं। आर्टीमीशिया की खेती से किसान मेहनत करके लाखों रुपए कमा रहे हैं। इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप उद्यान विभाग में संपर्क कर सकते हैं।

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