मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र में 15 साल पहले बकरीद के दिन ईंट से कूचकर मां राजेश देवी (30) और उसके छह साल के बेटे हिमांशु की हत्या के मामले में बरेली के अभियुक्त रईस उर्फ रहीस उर्फ जहूर हसन को फांसी की सजा सुनाई गई।
मृतका महिला के दोषी के साथ अवैध संबंध थे और वह साथ रहने की जिद कर रही थी। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय, कोर्ट संख्यया-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया।
सलेमपुर गांव निवासी सुरेश की पत्नी अपने बेटे के साथ सात नवंबर 2011 को घर से रुड़की जाने के लिए निकली लेकिन इसके बाद लापता हो गई। 13 नवंबर को चरथावल के जंगल में मां-बेटे का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। पीड़ित परिवार ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर 14 नवंबर को शिनाख्त की। पुलिस ने जांच के बाद बरेली के थाना बिशारतगंज क्षेत्र के गांव पराबाहुद्दीनपुर निवासी रईस उर्फ रहीस उर्फ जहूर हसन को गिरफ्तार किया। मृतका अवैध संबंध के साथ अभियुक्त के साथ रहने की जिद करने लगी थी, इसकी वजह से ईंट से कूचकर हत्या कर दी गई।
पुलिस ने 11 दिसंबर 2011 को आरोपी को पकड़ा लिया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में नौ गवाह पेश किए। अभियुक्त पर शुक्रवार को दोष सिद्ध हो गया। शनिवार को अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। सलेमपुर से इस तरह पहुंचे चरथावल पुलिस जांच में सामने आया कि राजेश साथ रहने का दबाव बना रही थी। बकरीद के दिन सात नवंबर को राजेश ने फोन कर अभियुक्त को सलेमपुर बुलाया। बेटे के साथ वह गांव के बस अड्डे पर मिली और तीनों यहां से टैंपू में सवार होकर चरथावल आ गए। पैदल-पैदल दोनों बात करते करते अलावलपुर मोड पर आ गए और एक ईंख के खेत में बैठकर बातचीत करने लगे।
इस दौरान हिमांशु सो गया। राजेश ने जिद दोहराई और गुस्से में आकर रहीस का गला पकड लिया। गला छुडाया आरोपी ने महिला का गला दबा दिया और पास में पड़ी ईंट उसके चेहरे व सिर में मारी, तभी बच्चा जग गया और रोने लगा। उसे भी उसी ईंट से सिर पर कई वार किए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वादी सुरेश बैंडबाजे में काम करता है। उसकी पत्नी राजेश भी कंपनी बाग में टंकी निर्माण के दौरान मजदूरी करती थी। यहीं पर उसकी जान पहचान टंकी बनाने वाले रहीस से हुई और प्रेम-संबंध बन गए।
न्यायालयों को वास्तविकता से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए
अभियुक्त के साथी राजमिस्त्री के पक्षद्रोही होने पर अदालत ने स्टेट ऑफ दिल्ली बनाम संजीव नंदा का भी उल्लेख किया। गवाह का पक्षद्रोही होना एक ऐसा पीड़ा दायक बिंदु है, जिसका न्यायालयों को सामना करना पड़ता है। कुछ दिनों से विशेषकर हाईप्रोफाइल मामलों में गवाह नियमित रूप से पक्षद्रोही हो रहे हैं। गवाह या तो वित्तीय कारणों से या अन्य लालच के कारण मुकर जाते हैं। जनता में यह भावना उत्पन्न हो रही है कि अभियुक्त तथा बलशाली व्यक्ति कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं, इससे उक्त व्यवस्था से लोगों का विश्वास हिल रहा है और डगमगा रहा है।
न्यायालयों को वास्तविकता से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। यदि कोई गवाह न्यायिक प्रक्रिया को तोड़ने के लिए या नष्ट करने के लिए पक्षद्रोही हुआ है, तब न्यायालयों को मूक दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए। अभियुक्त ने राजस्थान के धौलपुर की रहने वाली सीता से प्रेम-विवाह किया। इसके बाद इसी साल 22 जनवरी को पत्नी सीता की हत्या कर दी। आरोपी को सुनवाई के लिए बरेली जेल से लाया गया है।

