बनी सुपरवाइजर सेवा नियमावली, अब 59 साल तक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बन सकेंगी सुपरवाइजर

Anganwadi

देहरादून। महिला बाल विकास विभाग में अब 59 साल तक की आयु की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी सुपरवाइजर बन सकेंगी। इसके लिए कम से कम दस साल की सेवा एवं स्नातक होना अनिवार्य है। विभाग की ओर से नई सेवा नियमावली बनाई गई है। कैबिनेट की बैठक में इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अमर उजाला ने 23 अक्तूबर के अंक में इसका खुलासा किया था।

महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव हरी चंद सेमवाल के मुताबिक प्रदेश की अब तक अपनी सुपरवाइजर सेवा नियमावली नहीं थी। अब तक उत्तर प्रदेश की सेवा नियमावली चल रही थी, लेकिन कैबिनेट की बैठक में राज्य की सुपरवाइजर सेवा नियमावली को मंजूरी दी गई है। जिसमें 50 फीसदी पदोन्नति मिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से सुपरवाइजर के पदों पर होगी। जबकि शेष 50 फीसदी पदोन्नति अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से होंगी।

आशा फैसिलिटेटर की प्रोत्साहन राशि में एक हजार की बढ़ोतरी सरकार ने प्रदेश में कार्यरत आशा फैसिलिटेटर को प्रोत्साहन राशि एक हजार बढ़ा कर राहत दी है। इससे छह सौ से अधिक आशा फैसिलिटेटर को अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में 12 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ता तैनात हैं।

आशा वर्करों के कार्यों की मानीटरिंग आशा फैसिलिटेटर करती है। अभी तक आशा फैसिलिटेटर को केंद्र सरकार की ओर से प्रति भ्रमण पर 300 रुपये और राज्य सरकार 50 रुपये प्रोत्साहन राशि देती है। जिसमें एक महीना में फैसिलिटेटर को अधिकतम 20 भ्रमण करने होते हैं। अभी तक सरकार 20 भ्रमण के आधार पर आशा फैसिलिटेटर को एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देती है। अब उसे बढ़ा कर दो हजार रुपये किया गया। यानी प्रति भ्रमण पर राज्य सरकार की तरफ से 100 रुपये दिया जाएगा। प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से सरकार पर 1.45 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा।

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