भारतीय वैज्ञानिक आविष्कारों का आधार रहे हैं संस्कृत में लिखे प्राचीन ग्रंथ

Ancient texts

आगरा। भारत में हजारों वर्ष पूर्व विभिन्न वैज्ञानिक आविष्कारों का आधार संस्कृत के प्राचीन ग्रंथ ही हैं। इस का ज्ञान युवाओं में एवं सर्वसामान्य जन को कराने की हैं आवश्यकता है। आज विश्व के अनेक देशों में संस्कृत भाषा के प्रति आकर्षण दिखाई दे रहा है। इसके लिए संस्कृत भारती द्वारा चलाए जा रहे अभियान में लोगों को जागरूक कर संस्कृत भाषा को सर्वसाधारण की भाषा बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

यह विचार मथुरा में संस्कृत भारती ब्रज प्रांत संगठन मंत्री आचार्य श्रवण कुमार ने केशव भवन संस्कृत भारती ब्रज प्रांत कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। गोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. पल्लवी सिंह ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में संस्कृत भारती द्वारा चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए कहा कि भारत की युवा पीढ़ी को संस्कृत के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है।

विद्वत परिषद ब्रज प्रांत संयोजक डॉ. अजीत कुमार जैन ने कहा कि संस्कृत भाषा भारत की ही नहीं विश्व की सबसे प्राचीनतम भाषा है। इसलिए संस्कृत भाषा को देवभाषा कहा जाता है। ब्रज प्रांत मंत्री डॉ. धर्मेंद्र कुमार अग्रवाल ने संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण शिविरों की जानकारी दी। समीक्षा योजना गोष्ठी में मथुरा, आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, हाथरस, बदायूं, बरेली, एटा मैनपुरी आदि विभागों से पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत भारती ब्रज प्रांत न्यास अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल ने की। मथुरा महानगर मंत्री आचार्य मुरलीधर चतुर्वेदी, महानगर प्रचार प्रमुख रामदास चतुर्वेदी पार्षद व कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय आवा, पत्राचार प्रमुख आचार्य अरुण शर्मा और कुसुम लता शर्मा आदि मौजूद रहीं।

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