आशा कार्यकत्रियों ने किया हंगामा, सरकार, विभाग की खोली पोल

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देहरादून l सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में जिलाधिकारी सविन बंसल ने सोमवार को आशा कार्यकत्रियों के साथ संवाद किया। जिलाधिकारी ने आशाओं को संबोधित किया। उनसे बातचीत की। आशा कार्यकत्रियों की इच्छा डीएम के सामने अपनी दिक्कतों को रखने की थी लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इससे आशा कार्यकत्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शासन, विभाग, दून मेडिकल कालेज प्रशासन, जिला अस्पताल की कलई खोलकर रख दी।

जैसे ही जिलाधिकारी सविन बंसल, मुख्य नगर आयुक्त गौरव कुमार, मुख्य विकास अधिकारी समेत अन्य अफसर वहां से गए। आशाओं का गुस्सा फूट पड़ा। आशा शिवा दुबे ने कहा कि मीठी बातों और आश्वासन से पेट नहीं भरता। सरकार और विभाग उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। महीनों तक उनको मानदेय नहीं मिलता है। वे फील्ड का सारा काम करती हैं लेकिन इसका वित्तीय प्रतिफल बहुत कम है। अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ आदेश जारी करते हैं। ये लोग जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं। हमेशा आशाओं को अपमानित होना पड़ता है।

आक्रामक अंदाज में शिवा दुबे ने अधिकारियों को जमकर खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि डेंगू और मलेरिया रोकथाम के लिए वे लोग हमेशा पूरी मेहनत से काम करती रही हैं लेकिन इसके लिए उनको सिर्फ दो सौ रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। वहीं वालिंटर को प्रतिदिन छह सौ रुपये से अधिक मिल रहे हैं। फोन रिचार्ज की धनराशि भी दो वर्ष से नहीं मिली है।

मीना जखमोला, मीना कोठारी, मंजू काला समेत अन्य आशाओं ने भी कहा कि सरकारी अस्पताल का स्टाफ आशाओं और मरीजों के साथ बहुत खराब व्यवहार करते हैं। ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं जब गर्भस्थ महिलाओं को इलाज के बदले भगा दिया गया। हमारी शिकायतों पर दून अस्पताल प्रशासन और कोरोनेशन अस्पताल प्रशासन ध्यान नहीं देता। सभी आशाओं का कहना था कि कोरोनेशन जिला अस्पताल बदइंतजामी, उदासीनता और बदतमीजी का अड्डा बन चुका है। वहां के चिकित्सक और कार्मिक आशाओं से खराब व्यवहार करते हैं।

सभागार में जमकर नारेबाजी भी की गई। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. संजय जैन, एसीएमओ डा. केएस रावत और एसीएमओ डा. निधि रावत ने उन्हें समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वे उनकी समस्याओं को शासन व विभाग के आला अधिकारियों तक ले जाते हैं। उनके स्तर की दिक्कतों को दूर भी करते हैं। जिला मलेरिया अधिकारी सुभाष जोशी ने कहा कि हम समन्वय से काम करते हैं।

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