नई दिल्ली। Delhi Assembly Election दिल्ली विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए किसे चुनेगी। 11 बजे तक भाजपा 41 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। आप 28 सीटों पर आगे थी। वहीं कांग्रेस को किसी भी सीट पर बढ़त हासिल नहीं थी।
भाजपा अक्सर अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवारों के चयन को लेकर चौंकाने वाले फैसले लेती रही है। इस बार भी कुछ नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं, जिनमें प्रवेश वर्मा, रमेश बिधूड़ी, दुष्यंत गौतम और विजेंदर गुप्ता शामिल हैं।
प्रवेश वर्मा
प्रवेश वर्मा का नाम इसलिए खास है क्योंकि यदि वे जीतते हैं, तो आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को हराकर आएंगे। इससे उनकी सीएम पद की दावेदारी मजबूत हो सकती है। साथ ही, वे जाट समुदाय से आते हैं, जिससे हरियाणा और दिल्ली के जाट वोटरों को साधने में भाजपा को मदद मिल सकती है।
प्रवेश वर्मा ने पहले भी संकेत दिए हैं कि भाजपा ही दिल्ली के विकास में सक्षम है। उन्होंने कहा था, “दिल्ली के जाट नेता और भाजपा समर्थक मिलकर विकास की दिशा में काम करेंगे।”
रमेश बिधूड़ी
कालकाजी सीट से भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी भी इस दौड़ में शामिल हैं। वे गुर्जर समुदाय का प्रभावशाली चेहरा हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनके बयान विवादों में रहे हैं, लेकिन पार्टी ने उनके खिलाफ कभी सख्त रुख नहीं अपनाया। गुर्जर समुदाय में उनकी लोकप्रियता भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
दुष्यंत गौतम
करोल बाग सीट से भाजपा उम्मीदवार दुष्यंत गौतम को भी मुख्यमंत्री पद की रेस में देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भाजपा सभी को चौंकाते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बना सकती है। इससे एससी वोटरों को साधने में मदद मिलेगी और बिहार चुनावों को ध्यान में रखते हुए भी यह एक रणनीतिक कदम हो सकता है। भाजपा में फिलहाल कोई एससी मुख्यमंत्री नहीं है, ऐसे में यह फैसला बड़ा संकेत दे सकता है।
विजेंदर गुप्ता
भाजपा के वरिष्ठ नेता विजेंदर गुप्ता भी मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी के खिलाफ मुखर रहे हैं। 2020 के चुनाव में जब भाजपा को महज आठ सीटें मिली थीं, तब भी वे अपनी सीट बचाने में सफल रहे थे। इस बार भी वे रोहिणी सीट से आगे चल रहे हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हो रही है।
निष्कर्ष
भाजपा की संभावित जीत के साथ ही दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। पार्टी अपने पारंपरिक समीकरणों को साधने के लिए कोई चौंकाने वाला फैसला भी ले सकती है। अब देखना यह होगा कि भाजपा किसे दिल्ली की कमान सौंपती है।

