मंदी की गिरफ्त में चीन, पांच फीसदी से भी नीचे आई चीन की आर्थिक विकास दर

China economy

नई दिल्ली। चीन की अर्थव्यवस्था को तीसरी तिमाही में गहरा झटका लगा है। इस तिमाही में चीनी विकास दर (जीडीपी) मात्र 4.9 फीसदी रही जो दूसरी तिमाही में 7.9 फीसदी थी। यह गिरावट इस बात की पुष्टि करती है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। कोरोना महामारी के बाद संपत्ति क्षेत्र में मंदी, बिजली संकट व कच्चे माल की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ता की टूटन इसकी वजह रही।

ये जानकारी चीनी राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के ताजा आंकड़ों से सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब चौथी तिमाही में चीन की विकास दर को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ेगा जो 2021 के लिए चीन की जीडीपी ग्रोथ को और भी नीचे गिरा सकती है। निश्चित ही इसका असर चीन की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर भी पड़ना तय है जिनमें बीआरआई प्रोजेक्ट सबसे अहम है। हालात यदि जल्द नहीं सुधरे तो दूसरे देशों को चीन द्वारा दिया जाने वाला कर्ज भी टल सकता है जिससे राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर बुरा असर पड़ेगा। यह मंदी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नीति निर्माताओं पर आर्थिक विकास को ठीक करने में मदद के लिए दबाव बढ़ा रही है। बता दें कि चीन पिछले कुछ समय से भारी ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। यही नहीं, देश का रियल एस्टेट बाजार भी बुरी तरह टूटा हुआ हैं दूरगामी वैश्विक परियोजनाओं पर असर तय

मौजूदा वर्ष की पहली तिमाही में चीन की आर्थिक विकास की दर 18.3 फीसद थी, जो दूसरी तिमाही में गिरकर 7.9 फीसद रह गई। अब यह 4.9 फीसद पर आ गई है। यह पूरी तरह आर्थिक मंदी के संकेत हैं। चीन के लिए यह एक बेहद गंभीर झटका है क्योंकि यदि अगली तिमाही में भी इसे उबारा नहीं गया तो इस साल चीनी अर्थव्यवस्था ठप्प मानी जाएगी। इसका दूरगामी असर वैश्विक पर पड़ना तय है। आर्थिक विकास पर इसलिए लगा ब्रेक

की राय में टेक कंपनियों पर कसता शिकंजा और कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के अलावा बिजली संकट और कोयले की कमी ने देश के आर्थिक विकास पर ब्रेक लगाने का काम किया है। इतना ही नहीं ऊर्जा में आई कमी की वजह से चीन सरकार ने फैक्ट्रियों को मिलने वाली बिजली भी सीमित कर दी है जिसकी वजह से सितंबर में कई फैक्ट्रियां बंद तक हो गईं। उधर चीन में नियमों की सख्ती के चलते भी कंपनियां खस्ताहाल हैं। प्रॉपर्टी सेक्टर में मंदी, बिजली की तंगी की वजह से कारखानों का उत्पादन ठप्प है। घरेलू आर्थिक सुधार अभी भी अस्थिर और असमान

चीनी राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के प्रवक्ता फू लिंगहुई ने सोमवार को कहा, घरेलू आर्थिक सुधार अभी भी अस्थिर और असमान हैं। तीसरी तिमाही में प्रवेश करने के बाद से घरेलू और विदेशी जोखिम और चुनौतियां बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं और घरेलू अर्थव्यवस्था का पुररुद्धार अभी भी असंतुलित है।

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