देहरादून l उत्तराखंड के स्थानीय निकायों में एकल आयोग की सिफारिश के तहत ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। आयोग की सिफारिश के तहत तैयार उत्तराखंड नगर निगम-नगर पालिका (सीटों और पदों के आवंटन से संबंधित) संशोधन नियमावली 2024 को मंजूरी देने और विधानसभा में सदन के पटल पर रखने के लिए कैबिनेट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया है। इस कवायद के साथ ही एक तरह से उत्तराखंड में अक्तूबर माह में नगर निकायों के चुनाव का बिगुल भी बज गया है।
मौजूदा समय में स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत है। इस सीमा पर पुनर्विचार के लिए गठित एकल समर्पित वर्मा आयोग द्वारा सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। इस रिपोर्ट में ओबीसी के लिए आरक्षण की सीमा को मौजूदा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर कुछ पालिकाओं में 39 प्रतिशत तक किये जाने की सिफारिश की गई है। इसके तहत तैयार नियमावली को विधानसभा में पलट पर रखा जाना है।
बदल जाएगा निकायों का समीकरण
एकल सदस्यीय समर्पित आयोग की सिफारिशों के तहत सभी निकायों में मेयर, डिप्टी मेयर, चेयरमैन, पालिकाध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष से लेकर पार्षद, सभासद, वार्ड सदस्य तक की सीटों में इजाफा होगा। निगमों में मेयर का आरक्षण 14 से बढ़कर 18.05 प्रतिशत, पालिकाओं में अध्यक्ष का आरक्षण 14 से बढ़कर 28.10 और पंचायतों में अध्यक्ष का आरक्षण 14 से बढ़कर 38.97 प्रतिशत हो सकता है। कुल सीटों के मुकाबले आरक्षित सीटों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। नगर निगम में ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में 19.03, काशीपुर में 38.62 प्रतिशत, हरिद्वार जिले के हरिद्वार में 20.90 और रुड़की में 36.20 प्रतिशत, नैनीताल के हल्द्वानी में 18.42 प्रतिशत आरक्षण होगा।
मैदानी जिलों में केवल देहरादून में 14 से कम यानी 11.92 और ऋषिकेश में 9.06 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की संस्तुति की गई है। पर्वतीय जिले पौड़ी के कोटद्वार में 6.52 और श्रीनगर में 5.51 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की सिफारिश है। पालिकाओं के हिसाब से देखें तो देहरादून की विकासनगर में 22.93, डोईवाला में 34.82, मसूरी में 12.23 प्रतिशत, हरिद्वार की मंगलौर में 67.73, लक्सर में 36.04, शिवालिक नगर में 14.91 प्रतिशत, ऊधमसिंह नगर की गदरपुर में 37.85, जसपुर में 63.52, बाजपुर में 32.59, किच्छा में 46.05, सितारगंज में 49.11, खटीमा में 34.69, महुआखेड़ा गंज में 62.41 और नगला में 26.16 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की सिफारिश की गई है।
चमोली के गौचर, कर्णप्रयाग, टिहरी के देवप्रयाग, पौड़ी के पौड़ी व दुगड्डा, पिथौरागढ़ के पिथौरागढ़, डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेरीनाग, चंपावत जिले के चंपावत, लोहाघाट, अल्मोड़ा जिले के अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्वर जिले के बागेश्वर, नैनीताल जिले के नैनीताल, भवाली पालिकाओं में ओबीसी का आरक्षण 10 प्रतिशत से काफी कम है। सिफारिश के हिसाब से आरक्षण लागू होगा, बशर्ते एससी, एसटी व ओबीसी का आरक्षण कुल मिलाकर 50 प्रतिशत तक ही रहे।
भू व्यवस्थान का विधेयक तैयार
प्रदेश में नगर निकाय क्षेत्रों के विस्तार होने के फलस्वरूप ग्राम सभा की भूमि का नगर निकाय क्षेत्र में आने तथा इस संबंध में विभिन्न याचिकाओं में उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में ऐसी भूमि का जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम के दायरे से बाहर रखने की जरूरत है। इसके लिए “उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2024 को विधानसभा में पेश किया जाएगा। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। इसी तरह उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 (संशोधन) विधेयक, 2024 व उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 (संशोधन) विधेयक 2024 को भी विधानसभा में पेश किया जाएगा। फिलवक्त इस विषय पर एक अध्यादेश अस्तित्व में है।

