लखनऊ। निकाय चुनाव मामले में सरकार ने जवाब पेश कर दिया गया है। इस पर बहस के बाद बुधवार देर शाम तक फैसला आने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट का फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आया तो ये चुनाव अप्रैल.मई 2023 तक टल सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि फैसला सरकार के पक्ष में भी आया तो याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में उसे चुनौती देंगे। अगर फैसला सरकार के खिलाफ आया तो वह भी सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी या आयोग का गठन कर चुनाव को चार से पांच महीने के लिए टाल सकती है।
इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि ओबीसी आरक्षण लागू करने के मामले में अभी तक मांगे गए सारे जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिए गए हैं। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आपत्ति जताते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगने का निवेदन किया गया । जिसे कोर्ट ने नहीं माना।
दरअसल राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि निकाय चुनाव के मामले में 2017 में हुए ओबीसी के सर्वे को ही आरक्षण का आधार माना जाए। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव की तैयारी में ओबीसी आरक्षण तय करने में जो प्रक्रिया अपनाई गई है वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए गए ट्रिपल टेस्ट फार्मूले की सारी जरूरतों को पूरा करता है। लिहाजा इसको लेकर सारी याचिकाएं खारिज की जाएं।
वहीं कोर्ट ने निकाय चुनाव को लेकर रोक बुधवार तक बढ़ा दिया गया है। अब यह आज शाम तक कोर्ट के रूख से तय हो जाएगा कि निकाय चुनाव निर्धारित समय से हो पाएंगे या नहीं। कुल मिलाकर निकाय चुनाव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

