मां के हाथ से दही चीनी खाकर और आर्शीवाद लेकर यूपी लौटे सीएम योगी आदित्यनाथ

Yogi Adityanath

कोटद्वार। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का तीन दिवसीय यमकेश्वर दौरा परिजनों, ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के लिए यादगार रहेगा। बृहस्पतिवार को यूपी लौटते हुए योगी आदित्यनाथ ने अपनी मां सावित्री देवी के हाथों दही चीनी खाई और पैर छूकर आर्शीवाद लिया। मां ने भी बेटे पर अपना स्नेह लुटाया और लोक कल्याण के लिए समर्पित होकर काम करने का आर्शीवाद दिया। जाते हुए योगी आदित्यनाथ ने महायोगी गुरू गोरखनाथ महाविद्यालय पहुंचकर शिक्षकों से मुलाकात की और गुुरू अवेद्यनाथ की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रणाम किया।

तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर योगी आदित्यनाथ तीन मई को शाम तीन बजे यूपी सरकार के हेलीकाप्टर से यमकेश्वर पहुंचे थे। यहां आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने महायोगी गुरू गोरखनाथ महाविद्यालय परिसर में अपने गुुरू अवेद्यनाथ की प्रतिमा का अनावरण किया और जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद वह अपने व्यक्तिगत दौरे के तहत शाम करीब साढ़े पांच बजे पंचूर गांव पहुंच गए और वहां करीब 41 घंटे तक परिजनों, नाते रिश्तेदारों के बीच रहे। उनके छोटे भाई महेंद्र बिष्ट ने बताया कि उनका कार्यक्रम भले ही व्यक्तिगत था, लेकिन रात साढ़े दस बजे तक उनके ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का मिलने का दौर चलता रहा। उनकी ओर से किसी को भी निराश नहीं किया गया।

महेंद्र बताते हैं कि योगी आदित्यना‌थ संयास ग्रहण करने के बाद दो से तीन बार ही मां का हालचाल जानने के लिए गांव आए थे। यूपी की कमान संभालने के बाद वह पहली बार गांव आए। परिजन और नाते रिश्तेदार उन्हें रिश्ते से नहीं बल्कि महंत जी या महाराज जी कहकर संबोधित करते हैं। इन तीन दिनों में वे सभी से बड़ी आत्मीयता से मिले। बुधवार रात को भी लोग साढ़े दस बजे तक उनके मिलने पहुंचते रहे। लोगों से चर्चा के दौरान वे सभी से गांवों को आबाद रखने और पलायन न करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। ये तीन दिन क्षेत्रवासियों के लिए भी यादगार रहेंगे। लोगों का कहना है कि यमकेश्वर के लाल योगी आदित्यनाथ के यूपी जैसे बड़े प्रदेश की दोबारा सत्ता संभालने पर सभी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

बृहस्पतिवार सुबह योगी आदित्यनाथ चार बजे से पहले उठ गए ‌थे। नित्यक्रम के बाद करीब आधे घंटे योग ध्यान किया। गोशाला में गाय को पूरी रोटी खिलाई और फिर खुद नाश्ता किया। करीब साढ़े दस बजे वह घर से विदा लेकर महाविद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने गुरुजनों का आर्शीवाद लिया और गुरू अवेद्यनाथ की प्रतिमा के सामने मत्था टेककर हरिद्वार जाने के लिए हेलीपैड पहुंचे। ठीक 11 बजे उनके हेलीकाफ्टर ने हरिद्वार के लिए उड़ान भर दी।

योगी से मिलकर परिजनों और ग्रामीणों ने पुरानी यादें ताजा की
योगी आदित्यनाथ के तीन दिवसीय ग्राम प्रवास के दौरान उनके परिजनों के साथ ही सहपाठियों ने पुरानी यादें ताजा की। सभी लोग एक बार उनसे मिलना चाह रहे थे। इस दौरे ने उन्हें यह मौका दे दिया। यमकेश्वर के पंचूर गांव में उनकी 84 वर्षीय माता सावित्री देवी के साथ ही अन्य तीन भाइयों मानवेंद्र, शैलेंद्र और महेंद्र का परिवार रहता है। उनकी तीनों बड़ी बहनों पुष्पा, कौशिल्या और शशि का विवाह हो चुका है। महेंद्र के बेटे के मुंडन के लिए तीनों बहिनें गांव आई थी।

लंबे समय बाद भाई से मिलकर बहनें भावुक हो उठी। बहनों ने उनके साथ बिताए दिनों को याद किया। तीनों बहनें योगी अजय मोहन (योगी आदित्यनाथ का पूर्व का नाम) से बेहद स्नेह रखती थी। योगी से छोटा शैलेंद्र मोहन बिष्ट भारतीय सेना में है। वह भी छुट्टी लेकर इन दिनों गांव आया है। परिजनों का कहना है कि पिता आनंद सिंह बिष्ट का अप्रैल 2020 में कोरोनाकाल में दौरान निधन हो गया था। आज के कार्यक्रम में उनकी बड़ी कमी खल रही थी।

उनके निधन के समय योगी उनके अंतिम दर्शनों के लिए नहीं पहुंच सके थे। परिजन बताते हैं कि वर्ष 1993 में सन्यास धारण करने के बाद योगी आदित्यनाथ कई बार पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए उत्तराखंड आए थे। वर्ष 1999 में वह छोटे भाई शैलेंद्र मोहन और वर्ष 2013 में सबसे छोटे भाई महेंद्र की शादी में शामिल होने के लिए गांव पहुंचे थे। तब वे गोरखपुर से सांसद थे। इस बार उन्होंने ज्यादा समय देकर सभी के मिलने की मुराद पूरी कर दी। जाते वक्त वे मां के स्वास्थ्य और उपचार की ओर खास ध्यान देने की बात कहकर गए हैं।

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