सहारनपुर। हम आपको एक ऐसी फसल के बारे में बताने जा रहे हैं कि यदि आपने इसे सफलता पूर्वक कर लेंगे तो एक साल में ही मालामाल हो जाएंगे। इसकी खेती एक व्यक्ति अपनी साइंटिस्ट की नौकरी और उनकी पत्नी मल्टीनेशनल कंपनी की अच्छी खासी हाइली पेड नौकरी छोड़कर कर रहे हैं। बाजार में इसका भाव भी सुनकर आप चौंक जाएंगे। यह बाजार में पांच से आठ लाख रुपये किलो बिकती है। तो है न यह चौंकाने वाला। तो आइए जानते है इसके बारे में ….
सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं डॉ. विपिन परमार, वह टिशू कल्चर में पीएचडी एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में रिसर्च साइंटिस्ट थे। इतना ही नहीं उनकी पत्नी ममता परमार एमबीए हैं और एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम कर रहीं थी। दोनों अपनी नौकरी छोड़ दी और अब उन्होंने इसकी खेती शुरू कर दी । हम बात कर रहे हैं मशरूम की एक किस्म कीड़ाज़ड़ी की। यह दुनिया की सबसे महंगी मशरूम है। कीड़ाजड़ी मशरूम औषधीय गुणों का भंडार हैं। इसीलिए इसकी बाजार में अधिक मांग है। भारत में यह पांच से आठ लाख रुपये किलो तक बिकती है, जबकि अरब देशों में इसके दाम करीब 15 लाख रुपये किलो तक मिल जाते हैं।
दरअसल कीड़ाजड़ी मशरूम में प्रोटीन, अमीनो एसिड, विटामिन बी 1ए बी.2 और बी.12 के अलावा और भी कई गुण हैं। परमार दंपती अब इसी की खेती करने की तैयारी शुरू कर दी है। यहां हम बता दें कि इसके लिए आपको किसी खेत की जरूरत नहीं है, बल्कि आप अपने घर के किसी कमरे में इसका उत्पादन शुरू कर सकते हैं।
डॉ. विपिन परमार ने इसके लिए एक लैब की स्थापना की है। उनका कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो टिशू कल्चर से पौधे तैयार करने के अलावा इसके लिए एक लैब की स्थापना भी करेंगे। हालांकि इसके लिए उन्होंने 60 वर्ग मीटर की एक लैब तैयार कर ली है। इस लैब को बनाने में करीब दस लाख रुपये का खर्च आया है।
कीड़ाजड़ी करीब 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। इस लिहाज से इसके उत्पादक वर्ष में छह बार कीड़ाजड़ी को तैयार कर सकते हैं। उनकी लैब में एक बार में दो से तीन किलो तक कीड़ाजड़ी का उत्पादन हो सकता है। इस प्रकार एक वर्ष में उन्हें इससे प्रतिवर्ष 40 से 45 लाख रुपये तक की आमदनी होने की संभावना है।
ऐसे होता है लैब में कीड़ाजड़ी का उत्पादन
कीड़ाजड़ी मशरूम तैयार करने के लिए पहले एक कांच के जार में ब्राउन राइस आदि को 122 डिग्री सेल्सियस तापमान पर बैक्टीरिया मुक्त किया जाता है। इसके बाद ब्राउन राइस और लिक्विड कल्चर डाला जाता है। इसके बाद इसे लैब में 15 दिनों तक अंधेरे में रखा जाता है। इस दौरान लैब का तापमान 18 से 22 डिग्री और आर्द्रता 75 प्रतिशत तक रहनी चाहिए। कीड़ाजड़ी के तैयार होने के बाद इसे डिहाड्रेटर में सुखाया जाता है।
खाड़ी देशों में निर्यात करने की योजना
डॉक्टर परमार का कहना है कि उनकी योजना अरब देशों में कीड़ाजड़ी का निर्यात करने की है। कीड़ाजड़ी में जैसे पोषक तत्व होने के चलते दुनिया भर में इसे पसंद किया जाता है।

