साइबर ठगों ने उत्तराखंडियों से ठग लिए दो सौ करोड़

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देहरादून l साइबर क्राइम को रोकने के लिए दावे खूब किए जाते हैं लेकिन इसमें कमी होती हुई नजर नहीं आ रही है। इस साल नवम्बर आखिर तक के आंकड़ें बता रहे हैं कि उत्तराखंड में औसतन हर दिन कोई न कोई साइबर ठगी का शिकार हो रहा है।

नवम्बर तक प्रदेश में आईटी एक्ट के 483 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि कुल शिकायतों के आंकड़े 30 हजार के करीब हैं। वहीं ठगी की रकम की बात करें तो यह 200 करोड़ के करीब है। इसमें ठगी के ज्यादा मामले उन लोगों के हैं जो हाल फिलहाल में नौकरी से अवकाश प्राप्त होकर वापस लौटे हैं।

अनुमान है कि इस वर्ष की समाप्ति तक ऐसे मामलों की संख्या पांच सौ पार कर सकती है। हालत यह हैं कि कई प्रतिष्ठित लोग भी लाखों रुपये साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के मामले में गंवा चुके हैं। स्थिति यह की जिसके साथ यह अपराध होता है वह अपराध बोध से ग्रसित हो जाता है। समाज के सामने उपहास का पात्र न बना बन जाए, इसलिए घटित घटनाओं को छिपा जाते हैं।

उत्तराखंड साइबर सेल में इस तरह के मामलों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जरूरत है कि लोग खुद सतर्क रहें। यह संख्या और भी अधिक हो सकती हैं। क्योंकि कई बार अलग-अलग धाराओं में भी साइबर ठगी के मामले दर्ज कर लिए जाते हैं।

एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर के अनुसार, साइबर फ्रॉड अपराधियों के तार देश के बाहर से जुड़े होते हैं, लेकिन झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान तक फैले हुए हैं। समय-समय पर इनपुट के आधार पर स्पेशल टीम दबिश देती है और साइबर फ्रॉड गिरोह को सलाखों के पीछे भी भेजा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में इस वर्ष तीन साइबर गैंग का खुलासा भी किया जा चुका है।

साइबर सुरक्षा से बचाव के लिए पुलिस द्वारा समय-समय पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास भी किया जाता है लेकिन इस खेल के माहिर हर बार धोखाधड़ी का नया तरीका ढूंढ लेते हैं। ऐसे में जरूरत है कि साइबर सुरक्षा के कुछ बिंदुओं का ध्यान रखा जाए। इसमें नेटवर्क सुरक्षा, एप्लिकेशन सुरक्षा, सूचना सुरक्षा, क्लाउड सुरक्षा, आईओटी सुरक्षा के जरिये साइबर हमले से बचाव किया जा सकता है।

हाल के दिनों में एक नए तरह का साइबर अपराध सामने आ रहा है। जिसमें साइबर ठग पुलिस की वर्दी में लोगों को अलग-अलग तरह से धमका कर ठगते हैं। इसमें पुलिस की वर्दी में बैठा ठग अपने पीछे के बैकड्राॅप में किसी थाने का चित्र भी इस्तेमाल करता है। इसमें सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण क्षेत्र के लोग हो रहे हैं। इसके अलावा साइबर ठगों के लिए सबसे आसान टारगेट सरकारी नौकरी से लौट कर आए बुजुर्ग बन रहे हैं।


अगर आपसे कोई किसी भी तरह से रुपये की मांग कर रहा है तो सतर्क हो जाएं। इसकी सूचना तत्काल अपने पास के थाने या साइबर थाने को दें। ऑनलाइन आने वाले लिंक पर बिल्कुल क्लिक न करें और न ही अपना ओटीपी किसी के साथ शेयर करें। अनजान फोन काॅल्स पर लंबी बात न करें। ठग इस जरिये आपको अपनी बातों में फंसा कर ठगी कर सकता है। ठगे जाने के तुरंत बाद जानकारी पुलिस को दें ताकि तत्काल एक्शन लिया जा सके।

  • नवनीत भुल्लर, एसएसपी, एसटीएफ, उत्तराखंड
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