देहरादून। प्रज्ञा प्रवाह की राज्य ईकाई देवभूमि विचार मंच द्वारा उत्तराखंड में हो रहे धार्मिक आधार पर जनसंख्यकीय बदलाव का राज्य की आर्थिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक ताना-बाना, सांस्कृतिक विरासत के साथ साथ सामरिक दृष्टि से पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इस अध्ययन के लिए विशेषज्ञों से लेख भी आमंत्रित किए जाएंगे।
मामले को लेकर यहां नेहरू कॉलोनी स्थित कार्यालय में बैठक आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने राज्य में तेजी से हो रहा पलायन और धार्मिक आधार पर जनसंख्या बदलाव पर विस्तार से चर्चा की।
प्रज्ञा प्रवाह उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद राघव ने कहा कि राज्य में तेजी से हो रहा जनसंख्या बदलाव देवभूमि की अस्मिता के लिए एक बड़ी चुनौती है। आवश्यक है कि इन बदलावों के विभिन्न कारकों का विस्तार से अध्ययन कर समाधान के उपाय तलाशे जाएं। उत्तराखंड उच्च शिक्षा उन्नयन परिषद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर देवेंद्र भसीन ने कहा कि राज्य में जनसंख्या बदलाव एक प्रकार से नियोजित षडयंत्र नजर आता है, क्योंकि राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा बेहतर हो रही हैं।
ऐसे में कुछ क्षेत्रों में बढ़ रहा अनावश्यक जनसंख्या दबाव एक नई किस्म की चुनौती पेश कर रहा है। इसलिए आवश्यकता है कि इस प्रकार के बदलावों पर गहन शोध एवं अध्ययन किया जाए। विकास सारस्वत ने इन विषयों पर गहन एवं प्रमाणिक अध्ययन के लिए शोध प्रविधि कार्यशाला आयोजित करने की सलाह दी। प्रज्ञा प्रवाह अध्ययन परिषद की बैठक में डॉ. रवि दीक्षित, प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह, डॉक्टर कृष्ण चंद्र मिश्रा, विशाल वर्मा, सुमित प्रसाद, प्रोफेसर एचसी पुरोहित आदि उपस्थित रहे।

