पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर

dehradun news

देहरादून। परेड ग्राउंड में आयोजित 10वें विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में एथ्नोफार्माकोलॉजी और पारंपरिक चिकित्सकों की बैठक के तीसरे दिन की शुरुआत भारतीय जन स्वास्थ्य परंपरा के विकास के लिए नीति निर्धारण विषय पर पैनल चर्चा से हुई, जिसका संचालन डॉ. प्रकाश इटनकर ने किया।

इस सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. प्रकाश आर. इटनकर (आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय), डॉ. पुलोक मुखर्जी (आईबीएसडी, इंफाल), डॉ. प्रमोद एचजे (केएलई विश्वविद्यालय, बेलगाम), डॉ. मृतुंजय के (जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मैसूर) और डॉ. पद्मा वेंकट (यूपीईएस, देहरादून) शामिल थे।

इसके अलावा चर्चा में पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र से वैद्य सरोजनी गोयल (छत्तीसगढ़), वैद्य तरुण बोरा (असम), वैद्य उदय शंकर रॉय (त्रिपुरा), वैद्य संतोष कुमार भानुरे (मध्य प्रदेश), वैद्य आशीष भोंयर (महाराष्ट्र), वैद्य नंदलाल सिंह (झारखंड), वैद्य मखरानी (केरल) और वैद्य शंकर सिंह राजपुरोहित ने अपनी बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की।

पैनलिस्टों ने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, स्वास्थ्य परंपरा के संरक्षण, सशक्तिकरण, नीति निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात की। समापन समारोह में इस तीन दिवसीय बैठक के सार और भविष्य के लक्ष्यों को रेखांकित किया गया, जिससे पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की शुरुआत हुई।

advertisement at ghamasaana