नई दिल्ली। आपके लिए यह किसी खुशखबरी से कम नहीं है कि डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ने नहीं बल्कि घटने जा रही हैं। जी हां आप सही समझे यदि सब कुछ सही रहा तो आने वाले समय में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में दो से तीन रुपये की कमी आ सकती है। ऐसा क्यों होगा जब तेल को लेकर हाहाकर मचा हुआ था। लोग यहां तक कहने लगे थे कि चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल पर 15 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद तो पेट्रोल पंपों पर लोग की भीड़ उमड़ पडी, लोग बड़े-बड़े कैन लेकर तेल स्टोर करने लगे। हाहाकार मच गया। कई पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो गया। तो अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आइए हम आपको बताते हैं कि कैसे पेट्रोल और डीजल सस्ता होने जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से कच्चा तेल ऐसा भागा कि दुनिया की रफ्तार धीमी पड़ने लगी। आशंकाएं जताई जाने लगी कि क्रूड का भाव (Crude oil price) 300 डॉलर के पार जा सकता है। देश में पेट्रोल-डीजल 150 रुपए हो जाएगा । चुनाव के नतीजों के बाद भी पेट्रोल-डीजल का भाव जस का तस बना हुआ है।
कच्चा तेल या यूं कहें कि पेट्रोल-डीजल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अब महंगा नहीं रहा। पिछले पांच दिन में जिस तरह क्रूड ऊपर की तरफ भागा था, 2 दिन में ही वापस लौट रहा है । दो दिन में क्रूड $139 प्रति बैरल से फिसलकर रिकॉर्ड गिरावट के साथ $108.7 पर आ पहुंचा है। अब वो दिन दूर नहीं जब ये $100 के नीचे आ जाएगा, तो अब महंगा नहीं पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel price cut) तो सस्ता होने जा रहा है।
9 मार्च 2022 को देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाने वाली कंपनी BPCL के चेयरमैन और MD अरुण कुमार सिंह ने कहा था कि पेट्रोल और डीजल का रेट अब बढ़ने की जगह घटने वाला है। अनुमान सटीक था, लगातार दो दिन से कच्चे तेल के रेट में बहुत तेजी से गिरा है। एक दिन में रिकॉर्ड गिरावट आ जाएगी, ये किसी ने सोचा भी नहीं होगा। ग्लोबल संकट और बढ़ते क्रूड के भाव को देखते हुए UAE अब कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने का तैयार हो गया है। इस खबर के तुरन्त बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का रेट एक दिन में ही करीब 16.84 डॉलर (13.2 फीसदी) फिसलकर $111.14 प्रति बैरल पर आकर बंद हुआ है। 21 अप्रैल 2020 के बाद ये एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही। US क्रूड फ्यूचर्स भी 15.44 डॉलर (12.5 फीसदी) गिरावट के बाद 108.70 डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। ये नवंबर 2021 के बाद से सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट रही।
अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, दुनिया कच्चे तेल के इतने ज्यादा दाम बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि अगले 2 हफ्ते में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के भी नीचे आ सकती हैं। ऐसे में आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उनका तो यह भी कहना था कि कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ सकता है। अगर उनका अनुमान देखा जाए तो सही साबित होता लग रहा है। क्योंकि दो दिन में कच्चा तेल का इतना सस्ता हो गया कि तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। अगर कच्चा तेल 90 डॉलर के नीचे फिसलता है तो पेट्रोल-डीजल महंगा नहीं बल्कि सस्ता हो सकता है। IIFL सिक्योरिटीज के अनुज गुप्ता और BPCL चेयरमैन का मानना है कि कच्चे तेल की गिरावट से घरेलू मार्केट में तेल कंपनियों के मार्जिन को सपोर्ट मिलेगा और मौजूदा भाव से पेट्रोल-डीजल में 2-3 रुपए की कमी आ सकती है।

