- आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा आर्यम गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन
नोएडा l आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन मसूरी द्वारा गुरु पूर्णिमा पर आर्यम गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया। समारोह में देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए। नोएडा में अवस्थित फार्च्यून इन ग्राज़िआ सभागार में आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आर्यम गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2025 संपन्न हुआ। इस अवसर पर 44 को नव दीक्षा, 64 को मंत्र दीक्षा एवं 180 को शक्तिपात दीक्षा परमपूज्य जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज द्वारा प्रदान किया गया।

जगद्गुरु प्रो. पुष्पेंद्र कुमार आर्यम ने कहा कि गुरु वो है जो गुर यानी गुण देता हो। अध्यापक, आचार्यों और शिक्षकों के इतर गुरु वो होते हैं जो किसी एक विषय पर नहीं बल्कि समग्रता के साथ सभी ज्ञात और अज्ञात विषयों की सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करते हैं। उन्होंने शिक्षा के साथ दीक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कहा कि भगवान विष्णु त्रिमूर्ति में पालनकर्ता के रूप में स्थापित हैं। उनके कारण धरा सुरक्षित, जीवन संतुलित एवं धर्म जीवित रहता है। गुरु भी शिष्यों के जीवन में यही कार्य करते हैं। उनको धर्म से जोड़े रखना, दोषयुक्त प्रवृत्तियों से दूर रखना एवं उन्हें भौतिक जगत में बलिष्ठ बनाना। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का वह पर्व है जो प्राचीन काल से चली आई गुरु-शिष्य परंपरा को उत्सवधर्मिता के साथ स्थापित करता है।

गुरुदेव श्री आर्यम का कथन है कि गुरु वो है जो गुर यानी गुण देता हो। अध्यापक, आचार्यों, और शिक्षकों के इतर गुरु वो होते हैं जो किसी एक विषय पर नहीं बल्कि समग्रता के साथ सभी ज्ञात और अज्ञात विषयों की सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करते हैं। आज ही के दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था जिन्होंने वेदों का संकलन और महाभारत की रचना की थी।
श्री आर्यम गुरुदेव ने सभी शिष्यों को बताया कि गुरु अपने शिक्षा में पक्षपात नहीं करता है। इसके बावजूद कोई अर्जुन होता है तो कोई दुर्योधन। हमारी अभिरुचियाँ और अभिवृत्तियाँ ही हैं जो ये तय करती हैं कि हम किन गुणों का संचय और किन दोषों को तिरोहित करते हैं। जहाँ शिक्षा आपको सीमित रखती है वहीं दीक्षा आपको असीम छूने के काबिल बनाती है। इसी के चलते उन्होंनें जीवन में शिक्षा के साथ दीक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डाला।

आर्यम महोत्सव के दूसरे सत्र दीक्षा उत्सव में देश-विदेश से पधारे शिष्यों में 44 को नव दीक्षा, 64 को मंत्र दीक्षा एवं 180 को शक्तिपात दीक्षित होना का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आर्यम गुरुदेव अकेले ऐसे गुरु हैं जिन्होंने हिंदू वैदिक मूल्यों को परिवर्तित एवं संशोधित कर दीक्षा के लिए मयूरपंखी नीले रंग का चयन किया है। इस तथ्य को स्पष्ट करते हुए गुरुदेव ने कहा कि उनसे पूर्ववर्ती गुरुओं जिनमें अंगिरा ऋषि, गुरु गोरखनाथ, एवं दशमेश गुरु गोबिंद सिंह द्वारा यही रंग चयन किया गया था। यह मनुष्य जीवन में सप्त चक्रों में से एक सर्वाधिक सहस्त्र का प्रतिनिधित्व करता है। जिसके जागृत होने से मनुष्य जीवन में आध्यात्म एवं धार्मिक मूल्यों का श्रेष्ठ गुणों के साथ नए आयाम स्थापित होते हैं।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता मां यामिनी श्री ने बताया की आर्यम जी महाराज के विश्व भर में सर्वाधिक दीक्षित शिष्य हैं। जहां लोग औसत और साधारण को चुनते हैं वहीं आर्यम जी महाराज श्रेष्ठ को चुनने की शिक्षा देते हैं। वैदिक अग्निहोत्र, पुष्पार्चन, एवं विधिवत पाठों का प्रचार आर्यम गुरुदेव के प्रकल्प से ही संभव हो सका है। गुरुदेव द्वारा रचित ‘सत्य सनातन अमर रहे’ नारे की गूंज विदेश तक जाती है जब उनके शिष्य अपनी जीवन शैली में अग्निहोत्र और वैदिक प्रार्थनाओं को शामिल करते हैं। ज्ञातव्य हो कि आज गुरुदेव आर्यम की शिक्षाओं से एवं समाज उद्धारक प्रकल्पों की सहायता से लाखों लोगों का जीवन रूपांतरित हो रहा है।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता यामिनी श्री ने बताया कि दीक्षा समारोह में देश विदेश से 325 श्रद्धालु सम्मिलित हुए। समारोह में राकेश रघुवंशी, संध्या, सुनील आर्य, प्रीतेश आर्यम, हर्षिता आर्यम, श्वेता जायसवाल, शालिनी अरोड़ा, गौरव स्वामी, चंद्रपाल शर्मा, रोहित वेदवान, प्रदीप यादव आदि का सहयोग रहा।

