इटावा। मौत कब और किस रूप में आ जाए कोई नहीं जानता है। मौत किसी को बख्शती भी नहीं है। जेल में नौ साल से सजा काट रहे विजय को यह कहां पता था कि जेल से छूटते ही वह जीवन से ही छूट जाएगा। वहीं नौ साल से पिता का इंतजार कर रही बेटी के लिए भी यह आखिरी दिन होगा।
कन्नौज निवासी विजय इटावा जेल में नौ साल से सजा काट रहा था। उसकी सजा पूरी हो चुकी थी। वहीं नौ साल से बेटी एक-एक दिन गिनकर पिता के लौटने का इंतजार कर रही थी। एक पत्नी अपने पति के लिए पलक पांवड़े बिछाये हुई थी। उन्हें क्या पता था कि होनी को कुछ और ही मंजूर है।
बहरहाल इन सबका इंतजार खत्म हुआ और विजय की रिहाई हो गई। विजय को ले जाने के लिए उसकी बेटी और पत्नी दोनो आए हुए थे। विजय के बाहर आते ही बेटी भागकर पिता से लिपट गई। काफी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपट कर रोते रहे। इसके बाद पत्नी ने दोनों को ढांढ़स बंधाया। यह उनके लिए खुशी का पल था। आज यह परिवार बहुत ही खुश था।
इसके बाद वह लोग वहां से घर जाने के लिए निकले। इसके लिए उन लोगों ने ऑटो लिया, जिससे वहां से स्टेशन जाकर घर के लिए सवारी पकड़ सकेंगे, लेकिन विधाता को यह सब मंजूर नहीं था। रास्ते में तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक ने ऑटो में टक्कर मार दी। जिससे विजय और उसकी बेटी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं अस्पताल में पत्नी की हालत गंभीर बनी हुई है। इसे ही किस्मत का खेल कहते है। नौ साल का सफर मौत के साथ थम गया।

