खगेरिता साधुफलं जनेन तदर्चयायत्तदितं वरेण्यम्
सदौषधिस्नानविधानहोमा
अपवर्जनेभ्योSभ्युदयाय वा स्यात्।
ग्रहों द्वारा प्रदत्त अनिष्ट फल के निवारण हेतु उसी अनिष्टकारक ग्रह के दिन उसकी पूजा -जप आदि करना श्रेष्ठ होता है। ग्रहों से संबंधित औषधियों से स्नान ,हवन एवं दान करना अभ्युदय कारक होता है।
सूर्य के अनिष्ट होने पर-
यदि सूर्य अनिष्टकारक हो तो सभी कार्यों की सिद्धि के लिए (अनिष्ट दोष निवारण हेतु ) केशर,यष्टी,मधु,पद्मक,कमल का रेशा,इलायची ,मैनसिल,खस,श्रंगवल्ली तथा देवदारु इन सबको जल में मिलाकर स्नान करना चाहिए।
चंद्रमा के अनिष्ट होने पर –
यदि चंद्रमा अनिष्टकारक हो तो उसकी प्रसन्नता हेतु स्फटिक , हाथी का मद, विल्वपत्र,मोती कमल, सीप तथा शंख को पञ्चगव्य(गाय का दूध, दही,घी ,मूत्र और गोबर) जल में मिलाकर स्नान करना चाहिए।
मंगल के अनिष्ट दूर करने हेतु स्नान
अनिष्टकर मंगल के दोष को दूर करने हेतु चंदन ,विल्वफल,हींग, इंगुदी,मालकांगनी,बला ,जटामासी, रक्तपुष्प,हाऊबेर,नागकेशर तथा जपाकुसुम की कोंपल से स्नान करना चाहिए।
बुध के अनिष्ट को दूर करने हेतु स्नान-
बुध के अनिष्टकर होने पर नागकेशर ,पुष्करमूल ,धान का लावा ( लाजा ) मोती गोरोचन ,क्षौद्रफल (मधु ) तथा पञ्चगव्य को मिलाकर स्नान करने से हितकारक होता है।
गुरु के अनिष्टकर होने पर औषधि स्नान
यदि वृहस्पति अशुभ स्थानों में स्थित होकर कष्टकर हो तो पीली सरसों ,यष्टी,मधु ,मालती पुष्प एवं यूथी पुष्प
( जूही,चमेली ) के पल्लवों को जल में मिलाकर स्नान करने से गुरु जनित कष्टों का शमन हो जाता है।
शुक्र के अनिष्ट को दूर करने हेतु-
शुक्र प्रदत्त अनिष्ट को दूर करने के लिए मनुष्य को श्वेत कमल ,मैनसिल ,इलायची ,पुष्करमूल तथा कुमकुम मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए।कुछ विद्वानों ने कमल से रहित उक्त वस्तुओं से स्नान करने को कहा है।अर्थात कमल से स्नान का निषेध किया है।
शनि प्रदत्त अनिष्ट दूर करने हेतु स्नान-
बला,अञ्जन(काली बेर ) काला तिल, धान का लावा ,लोंध,मोथा सूर्यमुखी के पुष्प ,इन वस्तुओं से स्नान करने पर शनि प्रदत्त अनिष्ट दूर होता है।
राहु प्रदत्त अनिष्ट दूर करने हेतु स्नान-
अशुभ स्थानों में राहु के स्थित होने पर जल,मोंथा ,विल्वपत्र,लालचंदन,केशर,
कस्तूरी,हाथी का मद, लोंध ,कण्टक तथा दूर्वा के साथ स्नान करने से राहुकृत अनिष्ट दूर होते हैं।
केतु प्रदत्त अनिष्ट दूर करने हेतु स्नान-
केतु के अशुभ होने पर तिलपत्रिका
( रक्तचंदन, रजन )मोथा ,कस्तूरी ,
हाथी का मद , ओलों का जल , भेड़ का मूत्र , अनार , तथा गिलोय से स्नान करने से केतु कृत अनिष्टों से छुटकारा मिलता है।


