नई दिल्ली। सिविल सेवा की परीक्षा में दिव्यांगों को भी अनुसूचित जाति/जनजाति की तरह असीमित संख्या में परीक्षा देने एवं परीक्षा देने की उम्र 42 साल से बढ़ाकर 47 साल करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा भारत के महालेखाकार सहित संघ लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही सुनवाई 15 दिसंबर के लिए स्थगित कर दी है।
पीठ ने इस मामले में सिविल सेवा की वर्ष 2021 की मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि इसमें कानून के अनुसार दिव्यांगों के लिए चार फीसदी आरक्षण नहीं दिया गया है। उसने कहा कि इस बार सिविल सेवा में 712 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया है। उसके अनुसार दिव्यांगों के लिए 29 सीट आरक्षित होनी चाहिए, जबकि उनके लिए 22 पद ही आरक्षित किए गए हैं।
अनुसूचित जाति/जनजाति की तरह दिव्यागों को भी अनगिनत बार परीक्षा देने की अनुमति देने की मांग करते हुए एक संस्था इवारा फाउंडेशन ने याचिका दाखिल की है। याची ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को लागू करने की मांग की है जिसमें कहा गया है कि दिव्यांग भी अनुसूचित जाति/जनजाति की तरह सामाजिक रूप से पिछड़े हैं। इसलिए दिव्यागों को भी उनकी तरह नौकरी व शिक्षा में लाभ मिलना चाहिए।

