बड़ा खुलासा : लखीमपुर कांड मे मरने वाले पंजाब के निवासी निकले

lakhimpur khiri kand

45 लाख मुआवजे वाला पेच फंस गया, क्योंकि मृतक किसान दरजीत सिंह, फेरु सिंह, लखविंदर सिंह और सुखविंदर सिंह ये सब लखीमपुर तो छोडीये, उत्तर प्रदेश के निवासी तक नही हैं। सब पंजाब के निवासी हैं। अब सवाल ये है कि ये पंजाब निवासी उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का विरोध करने क्यो गए थे? केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का विरोध करने लखीमपुर क्यो गए थे ?

यदिआप के पास रेल का टिकट नही होता है और य़ात्रा के दौरान ट्रेन हादसा हो जाता है तो कोई मुअवजा नही मिलता है चाहे घोषणा हो जाये। क्योंकि घोषणा करना और मिलना इसमें बहुत अंतर है।

चेक दे दिए हैं तभी तो ये जानकारी सामने आई है।
क्योंकि उनकी आईडी चेक हुई है। तब ये साबित हुआ है कि ये भीड़ पूरी पंजाब से आई थी।
हालांकि भिंडरावाले की फोटो वाले झंडे और T-shirt से जाहिर हो चुका था।

इस अराजक भीड़ में उत्तर प्रदेश के लोग जानबूझ कर शामिल नहीं किए गए थे। क्योंकि अगर उत्तर प्रदेश का गुंडा शामिल हुआ तो जेसीबी अपना काम अगले ही दिन कर देती।
इसलिए ऐसे लोग बुलाए गए जो अन्य कांग्रेस शासित राज्य के हों।

अब असलियत को समझिये..कांग्रेस इसको मुद्दा बना कर पंजाब जीतना चाहती है। ये बात टिकैत भी समझता है। टिकैत को पता है उसकी कोई दाल पंजाब मे नही गलेगी। उसने भी जल्द मामले को रफा दफा करना ही ठीक समझा।

मुआवजा तो मिलना नही है.. (हालांकि सरकार पूरी तरह अपना फर्ज निभा रही है ,लेकिन मरने वाले भी अपनी असलियत उजागर करवा रहे है ) घोषणा करवा दो बाकी तो सब तकनीकी कानूनी पेच मे फंस ही जायेगा।

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