नैनीताल। हल्द्वानी के आम्रपाली संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस के संघ सर चालक मोहन भागवत अभिभावक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने अपने उद्बोधन का ज्यादातर समय युवा पीढ़ी पर फोकस किया।
भागवत ने नशे की चुनौती, बच्चों के संस्कार के लिए अभिभावकों के दायित्व, परिवार, समाज पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर क्या देखा जाना चाहिए? उसे लेकर बच्चों में विवेक उत्पन्न करने की जिम्मेदारी परिवार की होती है।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम तीनों आश्रम का आधार है। कुटुंब वह भी है, जो अपनेपन से जुड़ता है। केवल अपनी नहीं बल्कि समाज की चिंता करनी है। उन्होंने परिवार में संस्कारों की बात के जरिए इशारों-इशारों में मतांतरण की बात भी रखी। कहा कि बच्चों के संस्कारों आदि पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
मोहन भागवत ने कहा कि तिरूपुर नामक स्थान पर बुनकर लोगों के सामने रोजगार को लेकर चिंता और चुनौती थी। इसके लिए उनके लिए समाज के लोग आगे आए। धन से लेकर तकनीकी रूप से एक दूसरे की मदद की गई। इसके बाद बुनकरों के काम की धाक पूरी दुनिया में बढ़ गई। भागवत ने नशे को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि चीन के लोगों को अफीम के जरिए पंगु बनाया गया था। यह प्रयोग हमारे यहां पर हो रहा है। हमारे यहां ड्रग्स भेजी जाती है। उससे लोग लाभ कमाते हैं, उस लाभ का पैसा कहां पर लगता है। यह हम सब जानते हैं।

