देहरादून। दूनघाटी रंगमंच के तत्वावधान में विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक वर्मा मुख्य अतिथि रहे। यहां करनपुर स्थित दून घाटी रंगमंच के प्रधान कार्यालय में विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अशोक वर्मा ने कहा कि नाटय भूषण लक्ष्मी नारायण जहां रंगमंच के भीष्म पितामह है और वहीं एक नाटय संस्था के रूप में भी विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि नाटय भूषण लक्ष्मी नारायण ने असंख्य थियेटरों में अपना योगदान दिया है और सरकारों को ऐसे व्यक्तित्व को प्रोत्साहित करन का काम करना चाहिए जिन्होंने रंगमंच की दिशा व दशा देने का काम किया है और पूर्व में कलाकारों को थियेटर से फिल्म लाइन में लिया जाता था और आज रंगमंच का आधुनिकीकरण हो गया है।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता बृजेश नारायण ने कहा कि रंगमंच पर कई बाते कही जा सकती है और भारत का रंगमंच प्राचीन रंगमंच में से एक हे और जो सबसे पुराना है और जहां देवताओं ने रंगमंडल की स्थापना की और नाटय शास्त्र की भी रचना की गई। उन्होंने कहा कि आज रंगमंच का आधुनिकीकरण हो गया है और इस दौरान उन्होंने शफदर हाशमी को भी याद किया।
इस अवसर पर एम एस चैहान ने कहा है कि नाटय भूषण लक्ष्मी नारायण से उन्होंने काफी कुछ सीखा है और वह प्रेरणास्त्रोत है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि ललित कुमार ढौढियाल, लक्ष्मी नारायण, विशाल जिन्दल, राम सिंह वालिया सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। इस अवसर पर दूनघाटी रंगमंच के संस्थापक अध्यक्ष नाटय भूषण लक्ष्मी नारायण, एम एस चैहान, महेश नारायण, आदेश नारायण, बृजेश नारायण, विजयवर्धन डंडरियाल, विशाल जिन्दल, राम सिंह वालिया एवं रंगमंच से जुडे हुए कलाकार शामिल थे। इस अवसर पर विचार गोष्ठी का सफल संचालन वरिष्ठ पत्रकार के एस बिष्ट ने किया।

