अखिलेश यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने पर सस्पेंस, पहले चरण के लिए भी प्रत्याशी घोषित नहीं

uncle rebellious attitude increases Akhilesh trouble

लखनऊ। लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। पहले चरण के लिए नामांकन भी शुरू हो गए हैं। हालांकि कई राजनीतिक दलों ने पहले चरण के लिए अभी तक कई सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। वहीं इस बार सपा मुखिया अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है। उनके आजमगढ़ से लड़ने की संभावना थी, लेकिन अब वहां भी सपा ने प्रत्याशी घोषित कर दिया है। अब कन्नौज सीट केवल बाकी है और वहां से अखिलेश चुनाव लड़ेंगे इस पर संदेह है।

राजनीतिक दल का हर मुखिया अपने लिए सुरक्षित जगह खोजता है। ऐसे में अखिलेश वहां से चुनाव नहीं लड़ेंगे। संभावना है कि अखिलेश की पत्नी डिंपल कन्नौज से चुनाव लड़ सकती हैं, हालांकि वह पिछले चुनाव में वहां से हार गई थीं। ऐसे में सपा वहां से डिंपल को लड़ाने का रिस्क लेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। बहरहाल राजनीतिक दलों के प्रत्याशी घोषित करने का सिलसिला जारी है। वहीं सपा ने जाट कार्ड खेलते हुए बागपत में मनोज चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। इस तरह जाट वोटों में बिखराव होता है तो रालोद. भाजपा गठबंधन के लिए परेशानी बढ़ सकती है।

ककड़ीपुर गांव के रहने वाले मनोज चौधरी राजनीति शुरू करने से सपा के साथ जुड़े है। उनको सपा ने वर्ष 2012 में पहली बार छपरौली विधानसभा से टिकट दिया थाए मगर वह हार गए थे। उसके बाद दोबारा से वर्ष 2017 में छपरौली से चुनाव मैदान में उतारा गयाए जिसमें उनको काफी अच्छे वोट मिले थे। मगर उस बार भी वह जीत दर्ज नहीं कर सके। वह सपा के छह साल तक जिलाध्यक्ष भी रहे। अब सपा से लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने के लिए कई नाम चल रहे थे। मगर सपा ने एक महीने पहले ही ककड़ीपुर गांव के रहने वाले जाट बिरादरी से मनोज चौधरी को लोकसभा प्रभारी बनाया था। जिससे मनोज चौधरी को टिकट मिलने की ज्यादा उम्मीद थी और अब जाट कार्ड खेलते हुए सपा ने मनोज के नाम की घोषणा की।

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