गोंडा। जिला महिला अस्पताल में बच्चा बदलने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। वहीं परिजनों ने इसकी शिकायत सीएमएस और कोतवाली में की है। इस मामले में सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने बताया कि प्रसव के समय लिए गए बच्चे के फुट प्रिंट से इसकी पहचान कराई जाएगी।
बलिया जिले के निवासी इजहार शेख अपनी पत्नी सहाना को लेकर वैशाली एक्सप्रेस से ससुराल छपरा जा रहे थे। इस बीच पत्नी को प्रसव पीड़ा होने लगी। जिसके बाद गोंडा स्टेशन पर उतरकर सहाना को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां सोमवार को नार्मल प्रसव से बेटे के जन्म हुआ। अस्पताल कर्मियों के मुताबिक प्रीमेच्योर होने के कारण बच्चे को जिला महिला अस्पताल के न्यू सिक बॉर्न वार्ड में रखा गया। यहां एक ही जार में दो बच्चों को रखा गया था। जार में रखे दूसरे बच्चे की लगे स्लिप की अदला.बदली गलती से हो गयी।
परिजनों का आरोप न्यू सिक बॉर्न वार्ड में रखे बच्चे की हाथ पर लगी स्लिप को बदल दिया गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची। नगर कोतवाल राकेश सिंह भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझा कर शांत कराया। परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाया।
सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने बताया कि जार में रखे दोनों बच्चों के वजन में अंतर है। आरोप लगाने वाले परिजन का बच्चा प्री मेच्योर था जिसका वजन केवल तेरह सौ ग्राम ही था। जबकि, आपरेशन से पैदा होने वाले बच्चे का वजन ढाई किलो था। जन्म के समय ही फुट प्रिंट लिया गया। उसी से किसका बच्चा है इसकी पहचान हो जाएगी। फिलहाल एक ही जार में दो बच्चों के होने से भ्रम की स्थिति बनी है।

