अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) की फंडिंग रोकने का निर्णय लिया है। USAID पिछले 70 वर्षों से भारत के स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और कृषि जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा था। अब इस फंडिंग पर रोक के चलते भारत में कई प्रमुख विकास परियोजनाओं पर संकट गहरा गया है।
भारत में USAID के प्रमुख प्रोजेक्ट्स
USAID की स्थापना 1961 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी द्वारा की गई थी, ताकि विकासशील देशों को सहायता प्रदान की जा सके। यह संगठन 130 से अधिक देशों में काम करता है और अमेरिकी सरकार की सबसे बड़ी मानवीय और विकास शाखा माना जाता है। भारत में यह संगठन हेल्थकेयर, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक अवसंरचना (सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहा था।
भारत को मिला था कितना फंड?
वित्त वर्ष 2023 में USAID ने भारत को लगभग 140 मिलियन डॉलर की सहायता दी थी। इसमें से 55 मिलियन डॉलर हेल्थ सेक्टर, 18 मिलियन डॉलर पर्यावरण परियोजनाओं और 7.8 मिलियन डॉलर सामाजिक अवसंरचना के लिए आवंटित किए गए थे। भले ही यह भारत के कुल बजट का एक छोटा हिस्सा था, लेकिन कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को संचालित करने में इसने अहम भूमिका निभाई थी।
फंडिंग क्यों रोकी गई?
ट्रंप प्रशासन ने विदेशी सहायता की समीक्षा के बाद USAID की फंडिंग पर रोक लगाई है। इससे पहले जनवरी 2021 में भी USAID को सभी चल रही परियोजनाओं को रोकने का निर्देश दिया गया था। ट्रंप के करीबी सहयोगी एलन मस्क ने USAID को ‘आपराधिक संगठन’ करार दिया था, जिससे इसके भविष्य को लेकर और भी अनिश्चितता बढ़ गई थी। स्वयं ट्रंप ने एक मीडिया ब्रीफिंग में इसे ‘कट्टरपंथी वामपंथियों का समूह’ बताया था। अब इस एजेंसी की फंडिंग को पूरी तरह से रोक दिया गया है।

